इन रातोंको समज़ाये कोई

इन रातोंको समज़ाये कोई की,
इतनी मोहबत न करे हमसे,
क्योंकि वही छुटा है हमसे,
जिसने हमसे दिल लगाया है ।

सवरना तो हर हाल में,
खुद को ही पड़ता है,
क्योंकि वही दूर होता है हमसे,
जिससे साथ निभाने का वादा किया जाता है ।

बात बस किसी की यादो को
भुलाने की नही होती,
कभी कभी कमबख्त एक लम्हा ही
दिल को बेचैन बना जाता है ।।

सवर हर हाल में जाते है हम,
कहते है ना वक्त हर दर्द भुला देता है ।
बस कोई हमे वो वक्त लोटा दो
जिसकी दवा से ये दर्द भुलाया जाता है ।।

शायद अब इसी लिए
इन निंदोसे प्यार नही है कोई,
क्योंकि रातोंको को तो युही हर रोज,
बेवज़ह जगाया जाता है ।।

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